इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की कार्यप्रणाली
जैसाकि हमने पिछली पोस्ट में जाना कि प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी में दृश्य प्रकाश के प्रयोग के कारण उसकी विभेदन क्षमता की एक सीमा होती है जोकि लगभग २०० नैनोमीटर होती है| इससे निजात पाने के लिए लोगों ने सोचा कि क्यों न दृश्य प्रकाश के अतिरिक्त कोई ऐसी तरंग प्रयोग में लाई जाय जिसकी तरंग दैर्ध्य कम हो| कई विकल्प सामने आए जैसे कि पराबैंगनी (ultra-violet), एक्स-रे, गामा-रे इत्यादि, परन्तु इतना ही काफी नहीं था, जरूरत थी एक ऐसी तरंग की जोकि पहले तो पदार्थ से अंतःक्रिया (interaction) करके उसके प्रतिबिम्ब का निर्माण करे फ़िर उस प्रतिबिम्ब को देखा भी जा सके| ज्ञातव्य हो कि दृश्य प्रकाश के अलावा कोई भी विकिरण मानवीय नेत्रों से सीधे नहीं देखा जा सकता है| १९३१ में जर्मन वैज्ञानिक अर्न्स्ट रस्का और मैक्स नॉल ने डी-ब्रॉगली (de Broglie) सिद्धांत के आधार पर पहले इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का निर्माण किया| डी-ब्रॉगली सिद्धांत (वस्तुत: परिकल्पना) के अनुसार सभी पदार्थों में तरंगों जैसी प्रवृत्ति होती है और उनकी तरंग दैर्ध्य उनके आवेग के व्युत्क्रमानुपाती तथा आवृति उसकी गतिज ऊर्जा के समानुपाती होती है| सरल शब्दों में इलेक्ट्रॉन तरंग की भाँति व्यवहार करता है और इसकी तरंग दैर्ध्य को इसकी गतिज ऊर्जा से नियंत्रित कर सकते हैं| उदाहरण के लिए २०० किलो वोल्ट की इलेक्ट्रॉन तरंग की तरंग दैर्ध्य मात्र २.५ पिको मीटर (०.००२५ नैनोमीटर) होती है| जहाँ तक यह प्रश्न है कि इलेक्ट्रॉन तरंगों से निर्मित प्रतिबिंब को देखते कैसे हैं, इसका भी एक आसान तरीका है| इलेक्ट्रॉन तरंगें फोटोग्राफिक प्लेट को प्रदीपित करती हैं| अपने इस आविष्कार के लिए रस्का को १९८६ में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया | अब सोच लीजिये कितना समय लगता है नोबेल पुरस्कार के लिए; वैसे उसी वर्ष उनके साथ यह पुरस्कार दो युवा वैज्ञानिकों को भी दिया गया था जिन्होंने १९८१ में पहला क्रमवीक्षण अन्वेषक सूक्ष्मदर्शी (Scanning probe microscope) बनाया था|
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं …
१) प्रेषण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Transmission Electron Microscope / TEM)
२) क्रमवीक्षण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Scanning Electron Microscope / SEM)
इनमें से पहला सूक्ष्मदर्शी लगभग उसी सिद्धांत पर कार्य करता है जिस पर कि प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी करता है केवल इसमें कांच के लेंस के स्थान पर विद्युतस्थैतिक व विद्युतचुम्बकीय लेंस होते हैं| इसमें देखने वाली वस्तु को अत्यधिक पतला (~५० नैनोमीटर) बनाया जाता है क्योंकि इसमें इलेक्ट्रॉन तरंगें वस्तु के पार जाकर दूसरी ओर प्रतिबिम्ब निर्मित करती हैं| इसीलिए इसमें देखने के लिए नमूने की तैयारी करना काफी कठिन होता है और सभी वस्तुएं इसमें देखी भी नहीं जा सकतीं | क्योंकि अवलोकन के वस्तु को अत्यधिक ऊंचे निर्वात में रखा जाता है और उसके ऊपर अत्यधिक ऊर्जा की इलेक्ट्रॉन तरंगें गिरतीं हैं इसलिए जांच का यह एक विध्वंसक (destructive) तरीक़ा है| आधुनिक प्रेषण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता करीब ०.२ नैनोमीटर से भी कम होती है|
प्रेषण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Transmission Electron Microscope / TEM)
दूसरे प्रकार के सूक्ष्मदर्शी की कार्यप्रणाली थोड़ी अलग होती है इसमें इलेक्ट्रॉन तरंगों को केंद्रित करके एक सूक्ष्म पुंज पदार्थ पर डाला जाता है| जब ये अधिक ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन पदार्थ पर पड़ते हैं तो उससे अपेक्षाकृत कम ऊर्जा के द्वितीयक (secondary) इलेक्ट्रॉन, पृष्ठ प्रकीर्ण (back-scattered) इलेक्ट्रॉन तथा अभिलक्षणिक (characteristic) एक्स-रे इत्यादि निकलते हैं| इन इलेक्ट्रॉन किरणों की मदद से वस्तु के आकार के बारे में सूचना मिलती है और प्रतिबिम्ब का निर्माण किया जाता है| क्योंकि एकबार में वस्तु के केवल एक ही बिन्दु की सूचना मिलती है अतः किरण पुंज को क्रमशः अलग अलग स्थान पर ले जाकर पूरी वस्तु (या उसके एक भाग) का प्रतिबिम्ब निर्मित करते हैं| इसी कारण से इसे क्रमवीक्षण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी कहा जाता है| यद्यपि इसकी विभेदन क्षमता पहले वाले से करीब १० गुना कम होती परन्तु इसमें देखने के लिए नमूना तैयार करना काफ़ी आसान होता है| यही कारण है कि आज ये इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी कहीं अधिक लोकप्रिय है| यद्यपि इसमें अपेक्षाकृत कम ऊर्जा की इलेक्ट्रॉन तरंगें प्रयुक्त होती हैं फिरभी यह एक विध्वंसक तरीक़ा ही है| आधुनिक क्रमवीक्षण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता करीब १ से २ नैनोमीटर तक होती है|
क्रमवीक्षण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Scanning Electron Microscope / SEM)
इन दोनों ही सूक्ष्मदर्शियों में पदार्थ से निकलने वाली अभिलक्षणिक एक्स-रे के माध्यम से पदार्थ का गुणात्मक (qualitative) तथा परिमाणात्मक (quantitative) तात्त्विक विश्लेषण (elemental analysis) भी सम्भव है| इस विधि को एक्स-रे का ऊर्जा प्रकीर्णन विश्लेषण (Energy Dispersive Analysis of X-rays / EDAX) कहते हैं|
छायाचित्र सूचक:
१. इलेक्ट्रॉन बंदूक (electron gun)
२. विद्युत-चुम्बकीय लेंस (electromagnetic lens)
३. निर्वात पम्प प्रणाली (vacuum pump system)
४. नमूना मंच (sample stage)
५. नियंत्रण पट्टिका (control panel)
६. प्रदर्शन पट्टिका (display panel)
७. शीतलक (coolant)
८. कुछ और भूमिगत इलेक्ट्रानिकी (some more underground electronics)
९. प्रचालक गण (operators)
छायाचित्र स्रोत: http://www.vcbio.science.ru.nl/

