सूक्ष्म संरचना के तरीके
इस लेख में हम जानेंगे कि सूक्ष्म (माइक्रोमीटर) तथा अतिसूक्ष्म (नैनोमीटर) स्तर पर प्रायः किन विधियों का प्रयोग करके वस्तुओं तथा यंत्रों की संरचना की जाती है।
सूक्ष्म तथा अतिसूक्ष्म सरंचना के तरीकों को मुख्यतः दो प्रवर्गों में विभाजित किया जा सकता है |
१) शीर्ष पाद विधि (Top down approach):
जब प्रारम्भ में पदार्थ का बड़ा टुकड़ा ले कर उसे क्रमशः छोटा करते जाते हैं तो उसे शीर्ष पाद विधि या टॉप डाउन एप्रोच कहते हैं| यह संरचना के परम्परागत तरीकों का ही विकसित रूप है| इसके अंतर्गत आने वाली प्रमुख विधियाँ निम्न लिखित हैं -
क. माइक्रो-मशीनिंग (micro-machining)
ख. प्रकाश अश्मलेखन (photo-lithography)
ग. इलेक्ट्रॉन पुंज अश्मलेखन (electron beam lithography)
घ. संकेंद्रित आयन पुंज (focused ion beam/ FIB)
ङ. लेसर अपक्षरण (laser ablation)
२) आधार ऊर्ध्व विधि (bottom up approach):
इस विधि में एक-एक अणु को संयोजित करके अति सूक्ष्म वस्तुओं का निर्माण किया जाता है| यह नैनो युग में विकसित नयी तकनीक है| यद्यपि अभी यह पूर्ण रूप से विकसित नहीं है और अभी भी इस पर दुनिया भर में शोध चल रही है परन्तु कम से कम सैद्धांतिक रूप से यह काफ़ी आसान, सस्ती तथा न्यूनतम अवसंरचना (infrastructure) वाली विधि है| इसके अंतर्गत आने वाली मुख्य विधि है आणविक स्वतः संयोजन या मॉलीक्यूलर सेल्फ एसेम्बली (molecular self-assembly)|
अगले लेखों में मैं इनमें से कुछ प्रमुख विधियों पर एक एक करके प्रकाश डालूँगा|