नैनोविज्ञान

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Archive for March 2008

इलेक्ट्रॉन पुंज और संकेंद्रित आयन पुंज अश्मलेखन

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सूक्ष्म सरंचना के अगले तरीके हैं संकेंद्रित आयन पुंज (Focused Ion Beam / FIB) और इलेक्ट्रॉन पुंज अश्मलेखन (Electron Beam / e-beam Lithography)।

इलेक्ट्रॉन पुंज अश्मलेखन लगभग प्रकाश अश्मलेखन के ही सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें एक ऐसे पदार्थ (पॉलीमर) की झिल्ली बनाते हैं जिसमें कि इलेक्ट्रॉन पुंज के प्रभाव से रासायनिक बदलाव आते हैं ठीक वैसे ही जैसे प्रकाश रोधक में पराबैंगनी प्रकाश डालने पर आते हैं। इस पदार्थ को इलेक्ट्रॉन पुंज रोधक या ई-बीम रेज़िस्ट कहते हैं। इस विधि में किसी प्रकार के आच्छद का प्रयोग न करके इलेक्ट्रॉन पुंज को ही संकेन्द्रित करके उसका उपयोग कलम की भाँति लिखने में किया जाता है। इस कारण इस विधि से काफ़ी छोटी और जटिल संरचनायें बनाई जा सकती हैं परन्तु यह विधि बहुत धीमी होने की वजह से काफ़ी महँगी है। तुलनात्मक रूप से अगर देखा जाय तो प्रकाश अश्मलेखन मुद्रण जैसा है और इलेक्ट्रॉन पुंज अश्मलेखन कलम से लिखने जैसा।

वहीं दूसरी ओर संकेंद्रित आयन पुंज अश्मलेखन में इलेक्ट्रॉन पुंज के स्थान पर गैलियम आयन पुंज का प्रयोग करते हैं। गैलियम आयन इलेक्ट्रॉन की अपेक्षा काफ़ी भारी होते है। इस कारण संकेंद्रित आयन पुंज का संवेग काफ़ी अधिक होता है और इसका प्रयोग पदार्थ के चयनात्मक अपक्षरण (selective ablation) में किया जाता है। इसके लिये किसी विशिष्ट रोधक पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती, सीधे धातु या मृत्तिका (ceramic) के टुकड़े पर संरचना बनायी जा सकती है। आयन पुंज के प्रयोग से पदार्थ का निक्षेपण (deposition) भी किया जा सकता है। क्रमवार लिखने के कारण यह विधि भी धीमी और महँगी है।

Written by अंकुर वर्मा

March 9, 2008 at 4:38 pm