नैनोविज्ञान

नैनोविज्ञान तथा नैनोटेकनोलॉजी के बारे में कुछ रोचक जानकारियाँ…

Archive for the ‘सूक्ष्मदर्शी’ Category

स्कैनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी

with 2 comments

स्कैनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी (Scanning Tunneling Microscope) एक प्रकार का क्रमवीक्षण अन्वेषक सूक्ष्मदर्शी (Scanning Probe Microscope) है जो कुछ कुछ आणविक बल सूक्ष्मदर्शी की भाँति ही कार्य करता है। इसमें बाहुधारक के स्थान पर केवल एक शंक्वाकार अतिसूक्ष्म नोक ही होती है जो कि वस्तु की सतह के अतिनिकट जाकर वस्तु से उत्पन्न होने वाले टनलिंग विद्युत धारा प्रवाह (Tunneling Current) को महसूस करके वस्तु की सतह के चित्रण में सहायता करती है। अब थोड़ा टनलिंग विद्युत धारा प्रवाह के बारे में जान लिया जाय। आप जानते होंगे कि दो वस्तुओं के बीच विद्युत धारा प्रवाह तभी संभव होता है जब उन्हें किसी विद्युत चालक तार से जोड़ा जाता है। परन्तु अतिसूक्ष्म वस्तुओं के अध्ययन करते समय जब दो वस्तुओं को काफ़ी निकट लाया जाता है तो उनके बीच भी एक सूक्ष्म विद्युत धारा प्रवाह होने लगता है जिसे टनलिंग विद्युत धारा प्रवाह कहते हैं इसके बारे में और अधिक जानने के लिये शायद आपको क्वांटम यांत्रिकी विषय का एक अध्ययन करना पड़े। खैर जिस वस्तु का सतह चित्रण करना होता है उसके तथा शंक्वाकार अतिसूक्ष्म नोक के बीच एक विभवांतर लगाया जाता है जिसके लिये उस वस्तु का विद्युत चालक होना आवश्यक है। इस कारण से उत्पन्न टनलिंग करंट को एक अमीटर से नापते हैं। यह टनलिंग करंट नोक व वस्तु सतह की दूरी पर निर्भर करता है, कम दूरी अर्थात अधिक करंट। इस प्रकार से सूक्ष्मदर्शी की नोक को वस्तु की सतह के हर भाग पर ले जाकर और उसके टनलिंग करंट को नाप कर सतह का चित्रण कर लेते हैं। दूरी के अलावा ये टनलिंग करंट पदार्थ और उसकी प्रावस्था (phase) पर भी निर्भर करता है। इसलिये यदि कोई वस्तु एक से अधिक पदार्थ अथवा उसकी प्रावस्थाओं से बनी होती है तो उसे भी इस सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है। इस सूक्ष्मदर्शी के परिचालन संबन्धी जटिलताओं के चलते और चालक आणविक बल सूक्ष्मदर्शी (Conducting Atomic Force Microscope) के आविष्कार के बाद इसका प्रयोग अपेक्षाकृत कम हो गया है। परन्तु वास्तव में यही सूक्ष्मदर्शी आणविक बल सूक्ष्मदर्शी का प्रेरणा स्रोत है।


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

Written by अंकुर वर्मा

May 17, 2008 at 10:06 pm

आणविक बल सूक्ष्मदर्शी

with 2 comments

सूक्ष्मदर्शियों के अध्ययन के क्रम में अगली कड़ी है आणविक बल सूक्ष्मदर्शी (Atomic Force Microscope)| आयु की दृष्टि से यह नवीनतम सूक्ष्मदर्शी है जिसका आविष्कार १९८६ में हुआ| क्योंकि जाँच का यह एक अविध्वंसक (non-destructive) तरीका है अतः इसका प्रयोग बहुत से जैविक नमूनों के अध्ययन में किया जाता है| इसकी विभेदन क्षमता अन्य किसी भी सूक्ष्मदर्शी से कहीं अधिक होती है| इसके माध्यम से अणुओं को देख पाना भी सम्भव है| जैसा कि मैंने सूक्ष्मदर्शियों के बारे में अपने पहले लेख में बताया कि यह लगभग उसी तरह से काम करता है जिस प्रकार एक नेत्रहीन व्यक्ति किसी वस्तु के आकार का अनुमान लगता है|

आईये आणविक बल सूक्ष्मदर्शी के सिद्धांत को थोड़ा विस्तार से समझते हैं… आप सभी जानते होंगे कि दो अणुओं को यदि काफ़ी दूर से पास लाया जाय तो पहले उनके बीच परस्पर आकर्षण बल (वान-डर वाल्स बल) लगता है और जब वह एकदम निकट आ जाते हैं तो उनके गिर्द घूमते इलेक्ट्रॉनों की वजह से उनके बीच प्रतिकर्षण बल लगने लगता है| इस प्रक्रिया को प्रायः नीचे दिए गए स्थितिज ऊर्जा वक्र (potential energy curve) से निरूपित किया जाता है|

स्थितिज ऊर्जा वक्र

स्थितिज ऊर्जा वक्र

आणविक बल सूक्ष्मदर्शी इसी गुण का प्रयोग करके वस्तु की सतह का आरेख बनाता है| इसमें एक बाहुधारक (cantilever) होता है जिसके एक सिरे पर शंक्वाकार नोक (tip) बनी होती है| नोक और वस्तु की सतह पर स्थित अणुओं के बीच लगने वाले बल के कारण इस बाहुधारक की स्थिति में परिवर्तन होता है| इस विस्थापन को एक लेसर और फोटो-डायोड की मदद से अंकित कर लिया जाता है| आणविक बल सूक्ष्मदर्शी मुख्यतः दो विधियों से काम करता है – स्पर्श विधि (contact mode) तथा थपथपाहट विधि (tapping mode)। स्पर्श विधि में इसकी नोक वस्तु की सतह को स्पर्श करते हुए चलती है और इस प्रकार से वस्तु की सतह के सभी उतार चढ़ाव अंकित कर लिए जाते हैं| इस विधि से कठोर तथा चिकनी सतहों का चित्रण करते हैं तथा इस विधि की विभेदन क्षमता अधिक होती है| थपथपाहट विधि में बाहुधारक को उसकी नैसर्गिक आवृत्ति पर दोलन कराते हैं| नोक तथा वस्तु के अणुओं के बीच लगने वाले बल के कारण बाहुधारक की आवृत्ति बदल जाती है आवृत्ति परिवर्तन से वस्तु की सतह का अनुमान लगाया जाता है| इस विधि का प्रयोग कोमल तथा चिपचिपी सतहों के चित्रण में किया जाता है, परन्तु इस विधि से विभेदन क्षमता अपेक्षाकृत कम मिल पाती है|

आणविक बल सूक्ष्मदर्शी की क्रियाविधि

आणविक बल सूक्ष्मदर्शी की क्रियाविधि

क्योंकि इस सूक्ष्मदर्शी में इसकी नोक के द्वारा वस्तु की सतह को स्पर्श किया जाता है इसलिए इसका प्रयोग वस्तु की सतह के चित्रण के अतिरिक्त और भी बहुत सी प्रक्रियाओं में हो सकता है| उदाहरण के लिए अतिसूक्ष्म लेखन (~१० नैनो मीटर), वस्तु के सूक्ष्म भाग के यांत्रिक और वैद्युत गुणधर्म का अध्ययन इत्यादि| इन्हीं कारणोंवश इस सूक्ष्मदर्शी को नैनो युग का आधार स्तम्भ माना जाता है|

Written by अंकुर वर्मा

December 18, 2007 at 5:04 pm